दुनिया की इस महफ़िल में मोहब्बत मिलती है किस्मत से,बना दो ज़िन्दगी को जन्नत,ऐसी चाहत मिलती है किस्मत से,छिपा लो एहसास के उन लम्हों को महकती फिजाओं में,कर दो निसार खुशियों को प्यार कि उन बाहों में,निभाना साथ उस दिल का,धड़कता है जो तुम्हारे लिए बेरहम इस दुनिया में,क्यूंकि साँसें भी मिलती हैं किस्मत से.. …
हिन्दी काव्य संग्रह
कौन है जो एक साए कि तरह मेरे दिल को छू जाती है,कभी पास से,कभी दूर से,एक आवाज़,एक नगमा,एक गीत बनकरमेरी रग-रग में समा जाती है,कौन है जो मेरी तन्हाई का एहसास दिलाती है,खालीपन-सूनापन छोड़ जाती है,कौन है जो मुझमे होकर भी मेरे साथ नहीं है,मैं उसे देखना चाहता हूँ,मैं उसे जानना चाहता हूँ,मैं अपनी …
हज़ारों जुगनू हों तो भी चाँद कि रौशनी कभी कम ना होगी,दूर हुए तो क्या,हमारी मोहब्बत कभी कम ना होगी,जान जाए तो भी ग़म नहीं,वफायें हमारी कभी कम ना होगी,मेरे महबूब तेरी दीवानगी कि क़सम,अँधेरा दुनिया का छाया तो भी,मेरे दिल में तुम्हारी यादें कभी कम ना होगी,तेरे नूर से रौशन है यह दुनिया,क़यामत के …
पल भर में तमाम उम्र की सोचें बदल जाती हैं,जिन राहों पे चलते हैं,वो राहें बदल जाती हैं,करने को क्या नहीं करते लोग मोहब्बत में,सिर्फ हमारे लिए ही क्यूँ रस्में बदल जाती हैं,वो ऐसी है की उसका नाम सुन ने के तसव्वुर से ही,हमारी तमाम हसरतें बदल जाती हैं,सोचता हूँ जाने कैसे कह पाऊंगा मैं …
मुझे बस इतना कहना है कभी मैं याद आऊं तोकभी तन्हाई की रातें , तुम्हें ज्यादा सतायें तोकभी तित्तली ना बोले तो , और जुगनू लौट जायें तोकभी जब दिल भी भर जाये , कोई ना सुन ना पाये तोकभी जब दोस्त साथी जो तुम से रूठ जायें तोकभी जब खुद से लड़ कर थकन …
न मै दीवाना कहती हूँ न तो पागल समझती हूँतेरी यादो को इन पैरों की अब पायल समझती हूँहमारे दिल की दूरी घट नहीं सकती कभी क्यूंकिन तुम मुझको समझते हो न मै तुमको समझती हूँ मोहब्बत एक धोका है मोहब्बत एक फ़साना हैमोहब्बत सिर्फ ज़ज्बातों का झूठा कारखाना हैबहुत रोई हैं ये आँखें मोहब्बत …
अमावास की काली रातों में दिल कुछ भर सा जाता हैजाने हर रात कलेजे में एक दर्द ठहर सा जाता हैआवाजें सब चुप रहती हैं, सन्नाटे चिल्लाते हैंरोशनदानो के रस्ते अन्दर, स्याह अँधेरे आते हैंतन्हाई का हर लम्हा, सदियों सा लम्बा लगता हैजिन्दा हूँ पर जीने का, एहसास अचम्भा लगता हैऐसे में फिर यादों में …
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैमगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है, मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी हैये मेरा दिल समझता है या तेरा दिल समझता है !!! समुँदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकताये आसुँ प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता ,मेरी …
1. दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम,नज़र में ख़्वाबों की बिजलियाँ लेके चल रहे हो तो जिंदा हो तुम,हवा के झोंकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो,तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो,हर एक लम्हे से तुम मिलो खोल के अपनी बाहें,हर एक पल एक नया समाँ …
जावेद अख्तर की रचनाएँ (फिल्म “ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा” से ली गयी पंक्तियाँ..) Read More »
लफ्ज़-दर-लफ्ज़ यह किताब पढना चाहता हूँ,मैं तुम्हारी नज़र का हर ख्वाब पढना चाहता हूँ, जिनके माथे पे अंधेरों ने लिखी है तहरीर,उनके चेहरों पे अफताब पढना चाहता हूँ, महल के पाँव ने कुचला जिनको सदियों से,उनकी आँखों में इंक़लाब पढना चाहता हूँ, जिसको लिखा है गरीबों के खून से बनिये ने,सूद दर सूद वो हिसाब …
