जैन धर्म के सिंद्धांत में ‘अहिंसा’ और ‘कर्म’ प्रमुख हैं। इनका मानना है कि जीवों पर हिंसा मत करो और जो जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मलेगा। जैन धर्म के छः द्रव्य माने गए हैं जो इस प्रकार हैं – जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल। और इनके सात तत्वों को बताया …
Month: October 2023
जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर बताये गए हैं। जो धर्म का प्रवर्तन करते हैं। 1. श्री ऋषभनाथ- श्री ऋषभदेव आदिनाथ जी के द्वारा ही इस धर्म का प्रारम्भ हुआ था। ऋषभदेव के बारे में ऋग्वेद में बताया गया है। अर्थात इससे पता चलता है कि वेदों से पहले जैन धर्म का अस्तित्व था। इनका …
This liberation, as noted, is achieved in 14 steps which are based on the scriptures and the Five Vows: Stage 1: The soul languishes in darkness, ignorant of its true nature, and a slave to passions and illusion.Stage 2: The soul catches a glimpse of truth but is too mired in illusion to retain it.Stage …
किसी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है , और यह केवल आत्म ज्ञान प्राप्त कर के ठीक की जा सकती है सभी मनुष्य अपने स्वयं के दोष की वजह से दुखी होते हैं , और वे खुद अपनी गलती सुधार कर प्रसन्न हो सकते हैं आत्मा अकेले आती है …
