Jainism

एक गांव के लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि हमारे गांव के जंगल में भगवान महावीर कठिन तप कर रहे हैं और हमारे ही गांव के कुछ ग्वाले जब जंगल जाते हैं तो वे महावीर जी को तंग करते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं, टिप्पणियां करते हैं कि देखो ये आंखें बंद करके …

लक्ष्य बड़ा हो तो छोटी-छोटी बाधाओं पर ध्यान न दें, बिना रुके आगे बढ़ते रहें Read More »

उपवास में कमीं रह भी जाए तो.. उपहास से अवश्य बचना, दर्शन में कमीं रह भी जाए तो… प्रदर्शन से अवश्य बचना । वन्दन में कमीं रह भी जाए तो… बंधन से अवश्य बचना । प्रवचन श्रवण में कमीं रह भी जाए तो… दुर्वचन से अवश्य बचना । केश लोचन नहीं भी कर सकें तो.. …

कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ पड़ाव पर्व पर्युषण Read More »

पार्श्वनाथ प्रभु के 10 भव हुए। पूर्व भव में प्रभु की आत्मा प्राणत नाम के विमान में थी। वहाँ 20 सागरोपम का आयुष्य पूर्ण करके वहा रहेल मतिज्ञान , श्रुतज्ञान और अवधिज्ञान के साथ इक्ष्वाकुवंश के कश्यप गोत्र के काशी देश की वाराणसी नगरी के राजा अश्वसेन की वामादेवी राणी की कुक्षी में फागुन वद …

पार्श्वनाथ प्रभु Read More »

एक बार एक द्वेषी मनुष्य ने अपने शिष्यों से कहा- “ये जैन मुनि कितने गन्दें रहते हैं। कभी नहाते नहीं। इनसे तो सदा दूर ही रहना चाहिये”। किसी जैन भाई ने यह सुना। वे उसके पास पहुंचे और बोले- “महानुभाव !गाय कभी नहाती नहीं है और भेंस सदा पानी में ही पड़ रहती है। बताइये, …

पूज्य- शरीर या गुण Read More »

यूं कहें आज के “Logical World” में जैन धर्म हर चीज़ की लॉजिक सहित व्याख्या करता है। कहते है कि पूरा संसार नियमो से चलता है। मनुष्य जगत के भी अपने नियम होते है। यहां तक कि प्रकृति के कण कण में भी अपने नियम है। धर्म क्या है? शायद ही कोई व्यक्ति इसे परिभाषित …

वर्तमान में जैन धर्म की प्रासंगिकता Read More »

जैन धर्म की शिक्षाओं का भारतीय जनसंख्या पर धर्म, संस्कृति, भाषा, व्यंजन और इतने पर व्यापक प्रभाव है। जैन धर्म का वैश्विक प्रभाव भी है, और आज हम संयुक्त राज्य, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और पूर्वी अफ्रीका में जैन समुदाय की बड़ी आबादी पाते हैं। जैन धर्म में आज एक बहुत ही आधुनिक दृष्टिकोण है; यह …

जैन धर्म का प्रभाव Read More »

जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर बताये गए हैं। जो धर्म का प्रवर्तन करते हैं। 1. श्री ऋषभनाथ- श्री ऋषभदेव आदिनाथ जी के द्वारा ही इस धर्म का प्रारम्भ हुआ था। ऋषभदेव के बारे में ऋग्वेद में बताया गया है। अर्थात इससे पता चलता है कि वेदों से पहले जैन धर्म का अस्तित्व था। इनका …

24 तीर्थंकर Read More »

बौद्ध धर्म में नैतिकता (Ethics in Buddhism) –बौद्ध नैतिकता में मनुष्य द्वारा मनमाने ढंग से स्वयं के उपयोगितावादी उद्देश्य के लिये बनाए गए मानक नहीं हैं।मानव निर्मित कानून और सामाजिक रीति-रिवाज बौद्ध नैतिकता का आधार नहीं है।बौद्ध नैतिकता की नींव बदलते सामाजिक रीति-रिवाजों पर नहीं, बल्कि प्रकृति के अपरिवर्तनीय कानूनों पर रखी गई है।बौद्ध धर्म …

बौद्ध और जैन धर्म में नैतिकता Read More »

१. अहिंसा : जीवन का पहला मूलभूत सिद्धांत देते हुए भगवान महावीर ने कहा है ‘अहिंसा परमो धर्म’। इस अहिंसा में समस्त जीवन का सार समाया है ; इसे हम अपनी सामान्य दिनचर्या में ३ आवश्यक नीतियों का पालन कर समन्वित कर सकते हैं। क ] कायिक अहिंसा (कष्ट न देना): यह अहिंसा का सबसे …

जैन धर्म के पाँच मूलभूत सिद्धांत Read More »

भगवान महावीर का जन्म तकरीबन ढाई हजार साल पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली के गणतंत्र राज्य क्षत्रिय कुण्डलपुर में हुआ था। महावीर को ‘वीर’, ‘अतिवीर’ और ‘सन्मति’ भी कहा जाता है। तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उन्होंने एक लँगोटी तक का परिग्रह …

जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए भगवान महावीर ने Read More »