तेरी तस्वीर को जबसे सीने से लगा रखा है,तेरी कसम सारी दुनिया को भुला रखा है,तुझको एहसास न होगा मेरे जूनून का ए सनम,की तेरे नक़्शे कदम पर सर को झुका रखा है,जिस दिन से तुम मुझ से जुदा हुए हो जानेजां,सारी दुनिया से हमने दामन बचा रखा है,पहले पीते थे कभी तेरी मस्त आँखों …
हिन्दी काव्य संग्रह
मेरी तबाही पर मेरे चाहने वाले रोये,मेरे अंजाम पर मुझे मिटाने वाले रोये,सुबूत वफ़ा का इस से बढ़कर क्या होगा,मिलकर गले मुझसे दूर जाने वाले रोये,वफ़ा के नाम पर लूटा है जिसने हमको यारों,अक्सर तन्हाई में वो ही हमें आज़माने वाले रोये,ए मेरी जानेवफ़ा,तेरा क्या ज़िक्र करूँ,यहाँ हमसे सब दिल लगाने वाले रोये,कोई रोया तो …
“यह कविता,बचपन के सभी दोस्तों के नाम….” आतें हैं याद बहुत,बचपन के मेरे दोस्त,दिल में जिनकी ख़ास जगह है,बचपन के वो मेरे दोस्त॥ सुबह-सुबह उठ के स्कूल साथ जाना,एक ही बेंच पर बैठकर दिन बिताना,थके हुए कन्धों पर बस्ता टाँगे,स्कूल के बाद में भी साथ आना,दिल में जिनकी ख़ास जगह है,बचपन के मेरे दोस्त॥ चोर-पुलिस,छुपा-छुपी …
अपना हाल दिल की दीवारों को सुनाया है,इस तरह भी हमने खुद को बहलाया है,जब भी याद आई है तन्हाई में तुम्हारी,चुपके से तेरी तस्वीर को सीने से लगाया है,कभी तोहमत ना लगे तुझ पर बेवफाई की,इसीलिए तेरी बेवफाई को सबसे छुपाया है,उस शहर में तेरे बाद अब मेरा दिल नहीं लगता,इसीलिए आकर इस वीराने …
तेरी तस्वीर कमरे से हटाई नहीं जाती,मोहब्बत तुम्हारी दिल से भुलाई नहीं जाती,किस मोड़ पर ले आई है ज़िन्दगी मुझे,की शमा भी एक अब तो जलाई नहीं जाती,हमसफ़र साथ हो तो ज़िन्दगी जीने का मज़ा है,तन्हा रातें तो जवानी में बिताई नहीं जाती,आगोश में सिमटे हों, होठ से होठ मिले हों,ऐसी हसरतें तो सनम मिटाई …
वो पल तन्हाई के,वो मीठी-मीठी यादें,कुछ नमी सजी अश्कों की,वो सदियों लम्बी रातें,साँसों सी उलझी सर्द हवा जाने क्या बात सुनाये,टूटे पत्तों पर चलते कदम,तेरे आने की चाह जगाएं,मद्धम सा लगता सूरज जब मौसम भीना हो जाए,हल्का सा उलझा धुंआ,ख्वाब सा क्यूँ बन जाए,मिलकर भूले न कुछ,थी ऐसी नटखट वो शैतान,अब तो चेहरे पर पढता …
खिलते रहना कलियों की तरह,महकते रहना फूलों की तरह,गाते रहना झरनों की तरह,चलते रहना लहरों की तरह,ग़म को पीना अमृत की तरह,हँसकर जीना बसंत की तरह,काम को करना कुछ इस तरह,की किस्मत खुद तुमसे पूछे,की मैं तेरे पास आऊँ किस तरह॥ —मोहित कुमार जैन
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। डुबकियां सिंधु में गोताखोर …
अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर,पलक संपुटों में मदिरा भर,तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था?क्षण भर को क्यों प्यार किया था? ‘यह अधिकार कहाँ से लाया!’और न कुछ मैं कहने पाया –मेरे अधरों पर निज अधरों का तुमने रख भार दिया था!क्षण भर को क्यों प्यार किया था? वह क्षण अमर हुआ …
इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल केये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के दुनिया के रंज सहना और कुछ न मुँह से कहनासच्चाइयों के बल पे आगे को बढ़ते रहनारख दोगे एक दिन तुम संसार को बदल केइन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल केये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल …
