हिन्दी काव्य संग्रह

मन कहता है की बीत जाए यह ज़िन्दगी,तेरी जुल्फों के साए में खेलते हुए,हर धूप-हर छाँव ज़िन्दगी की बीत जाए,तेरी जुल्फों के साए में खेलते हुए,तेरी आँखों ने देखें हैं जो ख़्वाब हसीं,उन्हें पूरा करने निकल जाऊँ मैं,रास्ते में आने वाली मुश्किलों को जीत ता हुआइस जीवन के भंवर से पार लग जाऊँ मैं,तेरी जुल्फों …

तेरी जुल्फों के साए में खेलते हुए… Read More »

कही-अनकही सी बातें सब जानी-पहचानी सी लगती है,तुझसे मेरी मुलाक़ात पुरानी सी लगती है,लगता है तू साथ था मेरे कई जन्मों से,उन किस्से-कहानियों में अपनी कहानी सी लगती है,देखूं जो कहीं नज़र उठा कर इस चमन को मैं,हर ज़र्रे में तेरी कहानी सी लगती है,करें जो बात हम धडकनों की अपनी,तो तेरे मिलने के बाद …

कही-अनकही सी बातें … Read More »

ना कह पाए हम कुछ,समझे थे दिल ने बयान किया सब कुछ,पढ़ न पाए इन आँखों को तुम,दे गए अनजाने में इतना दर्द तुम,वीरानी लगती है ये ज़िन्दगी,कैसे काटूँगा प्यार के बिना ये ज़िन्दगी,बातें करनी थी बहुत हमको,ना जाने तुमको देख के क्या हो जाता था हमको,इतनी अनकही बातें ना सुनकर,चली गयीं तुम यूँ मुझे …

अनकही बातें… Read More »

आज फिर स्कूल जाने को दिल करता है,सुबह-सुबह जल्दी उठ कर नहाने को दिल करता है,स्कूल ड्रेस पहन कर टाई लगाने को दिल करता है,एक दूसरे को धक्का दे कर आगे बढ़ने को दिल करता है,आज फिर क्लास में खाली पीरियड में चाक मारने को दिल करता है,लंच टाइम में एक दुसरे का टिफ़िन खाने …

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‘उनको ये शिकायत है.. मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता,और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.’ ‘ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा, ज़माने में कौन है ??मैं इसलिए औरों की.. बुराई पे नही लिखता.’ ‘कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है ,ज़ख़्म कितने भी गहरे हों?? मैं उनकी …

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महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केसफसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंसअक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयींमहामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाईमंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारीभैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकाराकोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावेअक्ल घास जब …

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पल पल हर पल कहता है ये पल .रुकना जिन्दगी नहीं , आ मेरे साथ चल.हाथ मेरे थाम ले तू ,जायेगा किस्मत बदल.पल पल हर पल कहता है ये पल .रोज बदल्ती दुनिया में ,कौन जाने क्या होगा कल.दुनिया की इस भरी मेहफिल में , तेरा भी है कुछ रोल.पल पल हर पल कहता है …

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मुसाफ़िर हैं हम तो चले जा रहे हैं बड़ा ही सुहाना ग़ज़ल का सफ़र है।पता पूछते हो तो इतना पता है हमारा ठिकाना गुलाबी नगर है। ग़ज़ल ही हमारा अनोखा जहाँ है ग़ज़ल प्यार की वो हसीं दासताँ है।इसे जो भी सुनता है, वो झूमता है वो जादू है इसमें कुछ ऐसा असर है। ना …

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ऐसा नहीं कि यह ज़िन्दगी बुरी है,पर स्कूल लाइफ कि बात ही कुछ और थी,ऐसा नहीं कि अब हँसी नहीं आती,पर दोस्तों के बीच बैठ कर खिलखिलाने वाली बात कुछ और थी,ऐसा नहीं कि अब टेंशन से रात नहीं गुज़रती,पर एग्जाम कि रातों में जागने वाली बात कुछ और थी,ऐसा नहीं कि आगे आकर कुछ …

पुरानी दोस्ती… Read More »

महफ़िल जब लगी थी यारों कि,हमको भी बुलाया गया था,कैसे ना जाते हम,उनकी कसमें देकर जो बुलवाया था,कुछ कहने को जब कहा गया,तो ख़याल उनका ही आया था,फिर अक्षर-अक्षर जोड़ के मैंने,दिल का दर्द सुनाया था,तब आंसू उनकी यादों के ना-ना करते निकल गए,जो समझे वो खामोश रहे,बाकी वाह-वाह करते निकल गए….