हिन्दी काव्य संग्रह

ये दिल बहुत मासूम है,न खेलो इसकी मासूमियत से,ये दिल बहुत नाज़ुक है,न तोड़ो इसको फूल समझ के,ये दिल बहुत रंगीन है,न बदलो इसके रंग किसी से,बाँट सको तो बाँटो तुम,इस दिल के दुःख-दर्द को,जोड़ सको तो जोड़ो तुम,इस दिल के टुकड़ों को….

आँखों ही आँखों में कुछ,इशारे-इशारे होने दो,मौन शब्द होठों में,जो बात है दिल में,एहसास प्यार का होने दो,कुछ न कहो आज,ख़ामोशी को कुछ कहने दो… चांदनी रात सुहानी,मदभरी हवा को गाने दो,दो दिल मिल रहे,साँसों में साँस घुलने दो,पल ये थमने दो,कुछ न कहो आज,ख़ामोशी को कुछ कहने दो… होठों को छूके हलके से,प्यार की …

ख़ामोशी को कुछ कहने दो… Read More »

चल रहा हूँ बस चुपचाप चल रहा हूँ,थका नहीं,रुका नहीं बस चल रहा हूँ,दूर किसी क्षितिज सा दीखता रहता है मेरा सुख,जब भी जितना भी उसके करीब होता हूँ,वो फिर उतना ही दूर होता जाता है,अब तो आलम ये है की ये भी पता नहीं,किसके किता करीब और अपने से कितना दूर हो गया हूँ,जल …

मंजिल सफ़र में है Read More »

तेरी आँखों में आकर बोलती है,ग़ज़ल जो दिल के दीवानों में चुप है…कहानी एक अंजानो में चुप है.नदी आकर मैदानों में चुप है,लबों पर सिर्फ दुनिया की कहानी,तुम्हारी बात अफसानो में चुप है..हैं नंगे हम सभी हम्माम में,मगर ये बात परिधानों में चुप है,ना पंछी उड़ सके पिंजरों से आगे,कथा परवाज़ की दानों में चुप …

चुप है…. Read More »

कभी अपनी हँसी पर भी आता है गुस्सा,कभी सारे जहां को हँसाने को जी चाहता है,कभी छुपा लेते हैं ग़मों को दिल के किसी कोने में,कभी किसी को सब कुछ सुनाने को जी चाहता है,कभी रोता नहीं दिल टूट जाने पर भी,और कभी बस यूँ ही आँसू बहाने को जी चाहता है,कभी हँसी सी आ …

एक कविता….. Read More »

बिन मय बहकें मेरे क़दम,लेकिन मैं मदहोश नहीं हूं | दिखे अनजाने सारे जाने चेहरे,लेकिन मैं मदहोश नहीं हूं | जब तब थम जाये सोच मेरी,लेकिन मैं मदहोश नहीं हूं | हर दूजे पल बहके धङकन मेरी,लेकिन मैं मदहोश नहीं हूं | ख़ाली जैसे सारे जज्ब़ मेरे,लेकिन मैं मदहोश नहीं हूं | निहारे एक-टक उस …

लेकिन मैं मदहोश नहीं हूं Read More »

एक तन्हा मुसाफिर था,राहों पे यूं चलते हुयेअपनी ही धुन में ग़ाफिल था आयी लहर थी कुछ सपनों की,नए राहें रौशनी उसने भीदेखी थी वहां झलक अपनों की अन्जान न था वो दुनिया के दस्तूर से,वो टूटते जज्बो़ से देखेइन्सानी चेहरे होते बेनूर से फिर शामिल वो भी था उस जमात में,बनते जहां कम ही …

तन्हा मुसाफिर था Read More »

व्यथा है, एक कथा है, प्रेम की सदैव यही प्र‍था है,वर्ष बीते अनेक किंतु प्रेम बलिदान ने इतिहास रचा है,प्रीत रीत उस भले मानस की,आज भी प्रेरणास्त्रोत उंचा है, कितने राजे आये,प्रेम पंरपरा न डिगा पाये,कोयल सी इस कूक को, गीदड़बग्घी से न उरा पाये,कष्ट, पीड़ा की न सीमा,पर न कोई इसे मिटा पाये, प्रेम …

प्रेम Read More »

आज तक बहुत कुछ खोया है हमने,लेकिन आज कुछ पाने को दिल चाहता है.हर हालात को ख़ुशी से क़ुबूल किया है हमने,लेकिन आज उनसे लड़ने को दिल चाहता है.अब तक थे जिंदगी में तनहा हम लेकिन,अब किसी को अपना बनाने को दिल चाहता है.न जाने कब से नहीं सोये हैं हम लेकिन,आज जी भरके सोने …

एक कविता…..(30-01-2012) Read More »

कहता है दिल की चाहूँ तुझेबस यूँ ही..पल-पल छिप-छिपकर देखूँ तुझेबस यूँ ही..नींद जब ले रही हो तुम,तो साँसों को तुम्हारी सुनूँ..बस यूँ ही..सुबह की पहली किरण के साथ तेरे माथे की जुल्फें हटाऊँ मैं,बस यूँ ही..हर दुआ में तेरा साथ मांगूँहर ख्वाब में तेरा प्यारबस यूँ ही..कभी जब घर पर अकेली हो तुम,तो फ़ोन …

बस यूँ ही.. Read More »