वो ज़माना और था… कि जब पड़ोसियों के आधे बर्तन हमारे घर और हमारे बर्तन उनके घर मे होते थे। वो ज़माना और था .. कि जब पड़ोस के घर बेटी पीहर आती थी तो सारे मौहल्ले में रौनक होती थी। कि जब गेंहूँ साफ करना किटी पार्टी सा हुआ करता था , कि जब …
हिन्दी काव्य संग्रह
जो पीछे मुड़ कर के देखा तोकुछ यादें बुला रही थी,अब तक के सफर कीसारी बातें बता रही थी। कितनी मुश्किल राहें थींहम क्या क्या कर गए,एक सुकून की तलाश मेंकहां कहां से गुजर गए। कितने ही लोग मिले जीवन मेंकितने बिछुड़ गए,इस सफर मेंहर मुश्किल में साथ निभाने वालेजाने किधर खो गए इस सूनेपन …
हमारा भी एक जमाना था… खुद ही स्कूल जाना पड़ता था ,क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ;ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे… उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था, पास/नापास यही हमको मालूम था… % से हमारा कभी …
कभी जोआये मन मेंकोई बाततो…….उसे कहना ज़रूर !! न करनावक्त का इंतज़ारन होना मगरूर !! जब पिता काकिया कुछदिल को छू जायेतो जाकरगले उनकेलगना ज़रूरकभी जो आयेमन में कोई बातउसे कहना ज़रूर !! बनाये जब माँकुछ तुम्हारे मन काकांपते हाथों कोचूम लेना ज़रूरकभी जो आयेमन में कोई बातउसे कहना ज़रूर !! जब अस्त व्यस्त होकरबहन …
कृष्ण उठत, कृष्ण चलत, कृष्ण शाम-भोर है।कृष्ण बुद्धि, कृष्ण चित्त, कृष्ण मन विभोर है॥कृष्ण रात्रि, कृष्ण दिवस, कृष्ण स्वप्न-शयन है।कृष्ण काल, कृष्ण कला, कृष्ण मास-अयन है॥कृष्ण शब्द, कृष्ण अर्थ, कृष्ण ही परमार्थ है।कृष्ण कर्म, कृष्ण भाग्य, कृष्ण ही पुरुषार्थ है॥कृष्ण स्नेह, कृष्ण राग, कृष्ण ही अनुराग है।कृष्ण कली, कृष्ण कुसुम, कृष्ण ही पराग है॥कृष्ण भोग, …
तन्हा बैठा था एक दिन मैं अपने मकान में,चिड़िया बना रही थी घोंसला रोशनदान में। पल भर में आती पल भर में जाती थी वो,छोटे छोटे तिनके चोंच में भर लाती थी वो। बना रही थी वो अपना घर एक न्यारा,सिर्फ तिनका था, ना ईंट , न कोई गारा। कुछ दिन बाद…. मौसम बदला, हवा …
जो कह दिया वह शब्द थे ;जो नहीं कह सकेवो अनुभूति थी ।।और,जो कहना है मगर ;कह नहीं सकते,वो मर्यादा है ।। जिंदगी का क्या है ?आ कर नहाया,और,नहाकर चल दिए ।। बात पर गौर करना- —- पत्तों सी होती हैकई रिश्तों की उम्र,आज हरे——-!कल सूखे ——-! क्यों न हम,जड़ों से;रिश्ते निभाना सीखें ।। रिश्तों …
नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात.बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात.प्रेम भाव सब मिट गया, टूटे रीति-रिवाज.मोल नहीं सम्बन्ध का, पैसा सिर का ताज. भाई-भाई में हुआ, अब कुछ ऐसा वैर….रिश्ते टूटे खून के, प्यारे लगते गैर.दगा वक़्त पर दे गए, रिश्ते थे जो खास.यारो अब कैसे करे, गैरों पर विश्वास.अब तो …
ऐसे सास को बदनाम ना करोवो बहुत बड़ा दिल रखती हैजीवन की जमा पूंजी सब दे देती हैसौप देती जो कभी उनका थाजिस घर की मालकिन थी… तुम्हारे आने पर वो थाल सजाले तेरे हाथों के निशान,तेरी आरती उतारघर की चाबी भी सौप देती हैं.. अपना सब देकर,नजर तो रखेंगीतुझे आजमाने के लिएतेरी परीक्षा भी …
बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर आती है.. एक लड़की जब शादी कर औरत बन जाती है.. अपनों से नाता तोड़कर किसी गैर को अपनाती है.. अपनी ख्वाहिशों को जलाकर किसी और के सपने सजाती है.. सुबह सवेरे जागकर सबके लिए चाय बनाती है..नहा धोकर फिर सबके लिए नाश्ता बनाती है.. पति को …
