Jainism

जैन धर्म के सिंद्धांत में ‘अहिंसा’ और ‘कर्म’ प्रमुख हैं। इनका मानना है कि जीवों पर हिंसा मत करो और जो जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मलेगा। जैन धर्म के छः द्रव्य माने गए हैं जो इस प्रकार हैं – जीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश और काल। और इनके सात तत्वों को बताया …

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जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर बताये गए हैं। जो धर्म का प्रवर्तन करते हैं। 1. श्री ऋषभनाथ- श्री ऋषभदेव आदिनाथ जी के द्वारा ही इस धर्म का प्रारम्भ हुआ था। ऋषभदेव के बारे में ऋग्वेद में बताया गया है। अर्थात इससे पता चलता है कि वेदों से पहले जैन धर्म का अस्तित्व था। इनका …

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This liberation, as noted, is achieved in 14 steps which are based on the scriptures and the Five Vows: Stage 1: The soul languishes in darkness, ignorant of its true nature, and a slave to passions and illusion.Stage 2: The soul catches a glimpse of truth but is too mired in illusion to retain it.Stage …

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किसी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है , और यह केवल आत्म ज्ञान प्राप्त कर के ठीक की जा सकती है सभी मनुष्य अपने स्वयं के दोष की वजह से दुखी होते हैं , और वे खुद अपनी गलती सुधार कर प्रसन्न हो सकते हैं आत्मा अकेले आती है …

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एक गांव के लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि हमारे गांव के जंगल में भगवान महावीर कठिन तप कर रहे हैं और हमारे ही गांव के कुछ ग्वाले जब जंगल जाते हैं तो वे महावीर जी को तंग करते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं, टिप्पणियां करते हैं कि देखो ये आंखें बंद करके …

लक्ष्य बड़ा हो तो छोटी-छोटी बाधाओं पर ध्यान न दें, बिना रुके आगे बढ़ते रहें Read More »

उपवास में कमीं रह भी जाए तो.. उपहास से अवश्य बचना, दर्शन में कमीं रह भी जाए तो… प्रदर्शन से अवश्य बचना । वन्दन में कमीं रह भी जाए तो… बंधन से अवश्य बचना । प्रवचन श्रवण में कमीं रह भी जाए तो… दुर्वचन से अवश्य बचना । केश लोचन नहीं भी कर सकें तो.. …

कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ पड़ाव पर्व पर्युषण Read More »

पार्श्वनाथ प्रभु के 10 भव हुए। पूर्व भव में प्रभु की आत्मा प्राणत नाम के विमान में थी। वहाँ 20 सागरोपम का आयुष्य पूर्ण करके वहा रहेल मतिज्ञान , श्रुतज्ञान और अवधिज्ञान के साथ इक्ष्वाकुवंश के कश्यप गोत्र के काशी देश की वाराणसी नगरी के राजा अश्वसेन की वामादेवी राणी की कुक्षी में फागुन वद …

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एक बार एक द्वेषी मनुष्य ने अपने शिष्यों से कहा- “ये जैन मुनि कितने गन्दें रहते हैं। कभी नहाते नहीं। इनसे तो सदा दूर ही रहना चाहिये”। किसी जैन भाई ने यह सुना। वे उसके पास पहुंचे और बोले- “महानुभाव !गाय कभी नहाती नहीं है और भेंस सदा पानी में ही पड़ रहती है। बताइये, …

पूज्य- शरीर या गुण Read More »

यूं कहें आज के “Logical World” में जैन धर्म हर चीज़ की लॉजिक सहित व्याख्या करता है। कहते है कि पूरा संसार नियमो से चलता है। मनुष्य जगत के भी अपने नियम होते है। यहां तक कि प्रकृति के कण कण में भी अपने नियम है। धर्म क्या है? शायद ही कोई व्यक्ति इसे परिभाषित …

वर्तमान में जैन धर्म की प्रासंगिकता Read More »

जैन धर्म की शिक्षाओं का भारतीय जनसंख्या पर धर्म, संस्कृति, भाषा, व्यंजन और इतने पर व्यापक प्रभाव है। जैन धर्म का वैश्विक प्रभाव भी है, और आज हम संयुक्त राज्य, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और पूर्वी अफ्रीका में जैन समुदाय की बड़ी आबादी पाते हैं। जैन धर्म में आज एक बहुत ही आधुनिक दृष्टिकोण है; यह …

जैन धर्म का प्रभाव Read More »