हिन्दी के लेख

राम का घर छोड़ना एक षड्यंत्रों में घिरे राजकुमार की करुण कथा है और कृष्ण का घर छोड़ना गूढ़ कूटनीति। राम जो आदर्शों को निभाते हुए कष्ट सहते हैं, लेकिन कृष्ण षड्यंत्रों के हाथ नहीं आते, बल्कि स्थापित आदर्शों को चुनौती देते हुए एक नई परिपाटी को जन्म देते हैं। श्रीराम से श्री कृष्ण हो …

श्रीराम से श्री कृष्ण हो जाना Read More »

पुरुषार्थ को इसलिए मानो कि ताकि तुम केवल भाग्य के भरोसे बैठकर अकर्मण्य बनकर जीवन प्रगति का अवसर न खो बैठें और भाग्य को इसलिए मानो ताकि पुरुषार्थ करने के बावजूद भी मनोवांछित फल की प्राप्ति न होने पर भी आप उद्धिग्नता से ऊपर उठकर संतोष में जी सकें। जो लोग केवल पुरुषार्थ पर विश्वास …

पुरुषार्थ एवं भाग्य Read More »

पैसा, आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और धन-दौलत #ईश्वर_कृपा नहीं है। इस जीवन में अनेक संकट और विपदाएं जो हमारी जानकारी के बिना ही गायब हो जाती हैं, वह ईश्वर कृपा है। कभी-कभी सफ़र के दौरान भीड़ वाली जगह में धक्का-मुक्की के बावजूद हम किसी तरह से गिरते-गिरते बच जाते हैं और संतुलन बना लेते हैं। …

ईश्वर कृपा क्या है? Read More »

18 दिन के युद्ध ने, द्रोपदी की उम्र को80 वर्ष जैसा कर दिया था … शारीरिक रूप से भीऔर मानसिक रूप से भी शहर में चारों तरफ़विधवाओं का बाहुल्य था.. पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानीद्रौपदी हस्तिनापुर के महल मेंनिश्चेष्ट बैठी हुई शून्य को …

महाभारत हमारे अंदर ही छिपा हुआ है Read More »

🌹पहला किसी को अपने जीवन में प्राथमिकता न बनने दें, जब आप उनके जीवन में सिर्फ एक विकल्प हों। रिश्ते तभी बेहतर काम करते हैं, जब वे संतुलित हों… 🌹दूसरा खुद को कभी किसी को न समझाएं। क्योंकि जो आपको पसंद करता है उसे इसकी आवश्यकता नहीं है और जो व्यक्ति आपको पसंद नहीं करता …

स्वामी विवेकानंद के 7 छोटे सत्य Read More »

पहला सुख निरोगी काया।दूजा सुख घर में हो माया।तीजा सुख कुलवंती नारी।चौथा सुख सुत आज्ञाकारी। पाँचवा सुख सदन हो अपना।छट्ठा सुख सिर कोई ऋण ना।सातवाँ सुख चले व्यापारा।आठवाँ सुख हो सबका प्यारा। नौवाँ सुख भाई औ’ बहन हो ।दसवाँ सुख न बैरी स्वजन हो।ग्यारहवाँ मित्र हितैषी सच्चा।बारहवाँ सुख पड़ौसी अच्छा। तेरहवां सुख उत्तम हो शिक्षा।चौदहवाँ …

सोलह सुख Read More »

दोनों के अंतर को समझें और जीवन का आनंद लें ।इंसान को उम्र बढ़ने पर… “ बूढ़ा” नहीं बल्कि …. “ वरिष्ठ ” बनना चाहिए । • “ बुढ़ापा ”…अन्य लोगों का आधार ढूँढता है, “ वरिष्ठता ”… लोगों को आधार देती है. • “ बुढ़ापा ”… छुपाने का मन करता है, “वरिष्ठता”…उजागर करने का …

बुढ़ापा Vs. वरिष्ठता Read More »

दूसरे सभी उत्सव तो हम मनाते हैं लेकिन “गुरुपूर्णिमा” हमें मनाती है…. जैसे माँ अपने बच्चे को मनाती है कि ‘इधर आ जा बेटा ! अब बहुत खेल लिया….मिट्टी में मैला हो गया….गंदगी लग गयी….अब नहा-धोकर स्वच्छ हो जा और मक्खन-मिश्री खा ले…..ऐसे ही यह पूर्णिमा कहती है कि ‘जन्मों-जन्मों से इधर-उधर घूमते हुए जीव …

गुरुपूर्णिमा महोत्सव Read More »

पहले भटूरे को फुलाने के लिये उसमें ENO डालिये फिर भटूरे से फूले पेट को पिचकाने के लिये ENO पीजिये जीवन के कुछ गूढ़ रहस्य आप कभी नहीं समझ पायेंगे पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को जीभ से चाटकर कैल्शियम की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थीलेकिनइसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज …

एक बार मुड़ कर तो देखिये … Read More »

एक बनाया गया रिश्ता… पहले कभी एक दूसरे को देखा भी नहीं था…अब सारी जिंदगी एक दूसरे के साथ | पहले अपरिचित, फिर धीरे धीरे होता परिचय |धीरे-धीरे होने वाला हृदय स्पर्श,फिर नोकझोंक….झगड़े…बोलचाल बंद |कभी जिद, कभी अहम का भाव………. फिर धीरे धीरे बनती जाती प्रेम पुष्पों की मालाफिर एकजीवता, दो शरीर एक आत्मा | …

पति-पत्नी Read More »