कीमत पानी की नहीं, प्यास की होती है;कीमत मौत की नहीं, सांस की होती है;प्यार तो बहुत करते हैं दुनिया में;पर कीमत प्यार की नहीं विश्वास को होती है। नज़र चाहती है दीदार करना;दिल चाहता है प्यार करना;क्या बताऊं इस दिल का आलम;नसीब में लिखा है इंतजार करना। इंतज़ार की आरजू अब खो गई है;खामोशियों …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—23 Read More »

नासूर मेरी पीठ पर दस्तखत हैं दोस्तों के,सलामत है सीना अभी दुश्मनों के इंतजार में… उसकी निगाहों में इतना असर थाखरीद ली उसने एक नज़र में ज़िन्दगी मेरी… तेरी यादो के ये जखम मिले हमे !के अभी स़भले ही थे की फिर गिर पडे राज़ खोल देते हैं नाज़ुक से इशारे अक्सर,कितनी खामोश मोहब्बत की …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—22 Read More »

बड़ी गुस्ताखियाँ मेरा दिल करने लगा है मुझसे,ये कबसे तेरा हुआ है मेरी सुनता ही नहीं है… आईने जब देखा हमने चेहरा अपना,टूट कर उसने भी मेरा दर्द बता दिया… देखी है उसकी आँख में पहली बार नमी,यूँ लगा की जैसे समंदर उदास है… करो सितम कितने भी तुम मगर,दिल में धड़कन तुम्हारे नाम की …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—21 Read More »

मुमकिन है अब तुम से बात न हो,मुमकिन है अब तुमसे मुलाक़ात न हो,मेरी यादों को दिल में रखना ए दोस्त,मुमकिन है कल हम पास हो न हो… उससे कहना मज़े में हैं हम,बस ज़रा यादें सताती है,उसकी दूरी का गम नहीं मुझे,बस ज़रा आँखें भीग जाती है,उसको बस इतना बता देना,इतना आसान नहीं है …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—20 Read More »

मुरादों की मंजिल के सपनो मैं खोएमोहब्बत की राहों पे हम चल पड़े थे,जरा दूर चल के जब आँख खुली तोकड़ी धूप में हम अकेले खड़े थे… उनकी गलियों से जब गुज़रे तो मंज़र अजीब था,दर्द था मगर वो दिल के करीब था,जिसे हम ढूंढते थे अपनी हाथों की लकीरों में,वो किसी दूसरे की किस्मत, …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—18 Read More »

बैठे हुए हैं सामने एक दूसरे के हम,वो दिल लिए हुए हैं हम तमन्ना लिए हुए… हर तरफ राह मैं थे कांटे बिछे हुए,मुझ को तेरी तलब थी, गुज़रते चले गए… दिल को उसकी हसरत से खफा कैसे करूँ,अपने रब को भूल जाने कि खता कैसे करूँ,लहू बनकर रग रग में बस गए हैं वो,लहू …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—17 Read More »

तेरी ख़ुशी के लिए तेरा प्यार छोड़ चले,निकल के तेरे चमन से बहार छोड़ चले,सदा जो याद हमारी दिलाएगा तुझको,तेरे लिए वो दिल-ए-बेकरार छोड़ चले,उठा के लाश हम अपनी, खुद अपने कंधे पर,तड़पती आरजुओं का मज़ार छोड़ चले,हमे कुछ अपनी तबाही का ग़म नहीं लेकिन,मलाल ये है तुझे सो-गावर छोड़ चले…. इतना न तडपा कि …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—16 Read More »

सारे मंज़र बदल गए होंगे,आप हद्द से निकल गए होंगे,आग इतनी कहाँ थी फूलों में,हाथ शबनम से जल गए होंगे… जीने को तो जी रहे हैं उन के बगैर भी लेकिन,सजा-ए-मौत के मायूस कैदियों की तरह… कौन कहता है मुझे ठेस का एहसास नहीं,जिंदगी एक उदासी है जो तुम पास नहीं,मांग कर मैं न पियूं …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी—15 Read More »

खुदा से मांगते तो मुद्दत गुज़र गयी,क्यूँ न मैं आज उसको उसी से मांग लूं…. उसको खुदा से इतनी बार माँगा है,की अब तो हम सिर्फ हाथ उठाते हैं,तो सवाल फ़रिश्ते खुद ही लिख लेते हैं…. वो रूठते रहे,हम मनाते रहे,उनकी राहों में पलकें बिछाते रहे,उन्होंने कभी पलट कर भी न देखा,हम आँख झपकाने से …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी…..भाग १४ Read More »

आज भी उनकी नज़रों में राज़ वो ही था,चेहरा वो ही था,चेहरे का लिबास वो ही था,कैसे उनको मैं बेवफा कह दूं यारों,आज भी उनके देखने का अंदाज़ वो ही था……….. भीगी आँखों से मुस्कुराने का मज़ा कुछ और है,हँसते-हँसते पलके भिगोने का मज़ा कुछ और है,बात कहके तो कोई भी समझा सकता है,ख़ामोशी को …

महफ़िल-ए-शेर-ओ-शायरी…..भाग १३ Read More »