एक बार गांधीजी साबरमती आश्रम का निर्माण कर रहे थे तो गुजरात के एक बड़े विद्वान उनके पास आए और कहने लगे, ’’महात्मन! मैं आपके पास रहकर गीता का गूढ़ रहस्य समझना चाहता हूँ ।” महात्मा जी ने उनकी बात सुन ली और उन्होंने रावजी भाई को बुलाया। वे आश्रम की जिम्मेदारी चला रहे थे। …
घटना श्रीराम-रावण युद्ध के चौथे दिन की है। उस समय रावण के कहने पर उसके भाई अहिरावण ने श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था। अहिरावण मायावी था। वह विभीषण के रूप में राम-लक्ष्मण के शिविर में पहुंचा था, इस वजह से हनुमानजी भी उसे पहचान नहीं सके और वह अपनी योजना में सफल …
Procrastination is the bad habit of putting off until the day after tomorrow what should have been done the day before yesterday. For an achiever, perhaps the most dangerous, most destructive habit of all is procrastination, for it robs you of your initiative. When you put things off once, it’s easier to put them off …
Count that day lost whose descending sun finds you with no good deeds done. It is well known among those who make it a practice to help others that doing a service for another benefits the giver as much as — if not more than — the receiver. When you do a good deed for …
A kind word or small courtesy will be remembered and appreciated(Napoleon Hill) Read More »
यूं कहें आज के “Logical World” में जैन धर्म हर चीज़ की लॉजिक सहित व्याख्या करता है। कहते है कि पूरा संसार नियमो से चलता है। मनुष्य जगत के भी अपने नियम होते है। यहां तक कि प्रकृति के कण कण में भी अपने नियम है। धर्म क्या है? शायद ही कोई व्यक्ति इसे परिभाषित …
जैन धर्म की शिक्षाओं का भारतीय जनसंख्या पर धर्म, संस्कृति, भाषा, व्यंजन और इतने पर व्यापक प्रभाव है। जैन धर्म का वैश्विक प्रभाव भी है, और आज हम संयुक्त राज्य, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और पूर्वी अफ्रीका में जैन समुदाय की बड़ी आबादी पाते हैं। जैन धर्म में आज एक बहुत ही आधुनिक दृष्टिकोण है; यह …
जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर बताये गए हैं। जो धर्म का प्रवर्तन करते हैं। 1. श्री ऋषभनाथ- श्री ऋषभदेव आदिनाथ जी के द्वारा ही इस धर्म का प्रारम्भ हुआ था। ऋषभदेव के बारे में ऋग्वेद में बताया गया है। अर्थात इससे पता चलता है कि वेदों से पहले जैन धर्म का अस्तित्व था। इनका …
बौद्ध धर्म में नैतिकता (Ethics in Buddhism) –बौद्ध नैतिकता में मनुष्य द्वारा मनमाने ढंग से स्वयं के उपयोगितावादी उद्देश्य के लिये बनाए गए मानक नहीं हैं।मानव निर्मित कानून और सामाजिक रीति-रिवाज बौद्ध नैतिकता का आधार नहीं है।बौद्ध नैतिकता की नींव बदलते सामाजिक रीति-रिवाजों पर नहीं, बल्कि प्रकृति के अपरिवर्तनीय कानूनों पर रखी गई है।बौद्ध धर्म …
१. अहिंसा : जीवन का पहला मूलभूत सिद्धांत देते हुए भगवान महावीर ने कहा है ‘अहिंसा परमो धर्म’। इस अहिंसा में समस्त जीवन का सार समाया है ; इसे हम अपनी सामान्य दिनचर्या में ३ आवश्यक नीतियों का पालन कर समन्वित कर सकते हैं। क ] कायिक अहिंसा (कष्ट न देना): यह अहिंसा का सबसे …
भगवान महावीर का जन्म तकरीबन ढाई हजार साल पहले (ईसा से 599 वर्ष पूर्व), वैशाली के गणतंत्र राज्य क्षत्रिय कुण्डलपुर में हुआ था। महावीर को ‘वीर’, ‘अतिवीर’ और ‘सन्मति’ भी कहा जाता है। तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उन्होंने एक लँगोटी तक का परिग्रह …
जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए भगवान महावीर ने Read More »
