किसी भी सशंकित मन में काम की शुरुआत से ही डर हावी हो जाता है। हम सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति के जरिए अपने डर पर काबू पाते हुए काम को सफल अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।1)अक्सर यह देखा जाता है कि लोग अपनी सफलता को लेकर सशंकित रहते हैं। आप चाहे अध्ययन कर रहे …

हम पर हावी न हो डर Read More »

एक बार एक द्वेषी मनुष्य ने अपने शिष्यों से कहा- “ये जैन मुनि कितने गन्दें रहते हैं। कभी नहाते नहीं। इनसे तो सदा दूर ही रहना चाहिये”। किसी जैन भाई ने यह सुना। वे उसके पास पहुंचे और बोले- “महानुभाव !गाय कभी नहाती नहीं है और भेंस सदा पानी में ही पड़ रहती है। बताइये, …

पूज्य- शरीर या गुण Read More »

एक सेठ बहुत धनवान थे। उन्हें धन का बहुत घमंड था। एक दिन वे मुनिराज को पास पहुंचे और नमस्कार कर कहने लगे, स्वामिन्! आप तो विशेष ज्ञानी हैं, कुछ भविष्य की भी जानते होंगे। मुनिराज ने कहा – मैं तो भविष्यवक्ता हूँ। मेरी वाणी कोई भी क्या, सर्वज्ञ भी अन्यथा सिद्ध नहीं कर सकते। …

सच्ची भविष्यवाणी Read More »

एक बार गांधीजी साबरमती आश्रम का निर्माण कर रहे थे तो गुजरात के एक बड़े विद्वान उनके पास आए और कहने लगे, ’’महात्मन! मैं आपके पास रहकर गीता का गूढ़ रहस्य समझना चाहता हूँ ।” महात्मा जी ने उनकी बात सुन ली और उन्होंने रावजी भाई को बुलाया। वे आश्रम की जिम्मेदारी चला रहे थे। …

गीता का रहस्य Read More »

घटना श्रीराम-रावण युद्ध के चौथे दिन की है। उस समय रावण के कहने पर उसके भाई अहिरावण ने श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था। अहिरावण मायावी था। वह विभीषण के रूप में राम-लक्ष्मण के शिविर में पहुंचा था, इस वजह से हनुमानजी भी उसे पहचान नहीं सके और वह अपनी योजना में सफल …

सफलता अपने संकेत जरूर देती है। Read More »

Procrastination is the bad habit of putting off until the day after tomorrow what should have been done the day before yesterday. For an achiever, perhaps the most dangerous, most destructive habit of all is procrastination, for it robs you of your initiative. When you put things off once, it’s easier to put them off …

Procrastination(Napoleon Hill) Read More »

यूं कहें आज के “Logical World” में जैन धर्म हर चीज़ की लॉजिक सहित व्याख्या करता है। कहते है कि पूरा संसार नियमो से चलता है। मनुष्य जगत के भी अपने नियम होते है। यहां तक कि प्रकृति के कण कण में भी अपने नियम है। धर्म क्या है? शायद ही कोई व्यक्ति इसे परिभाषित …

वर्तमान में जैन धर्म की प्रासंगिकता Read More »

जैन धर्म की शिक्षाओं का भारतीय जनसंख्या पर धर्म, संस्कृति, भाषा, व्यंजन और इतने पर व्यापक प्रभाव है। जैन धर्म का वैश्विक प्रभाव भी है, और आज हम संयुक्त राज्य, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और पूर्वी अफ्रीका में जैन समुदाय की बड़ी आबादी पाते हैं। जैन धर्म में आज एक बहुत ही आधुनिक दृष्टिकोण है; यह …

जैन धर्म का प्रभाव Read More »

जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर बताये गए हैं। जो धर्म का प्रवर्तन करते हैं। 1. श्री ऋषभनाथ- श्री ऋषभदेव आदिनाथ जी के द्वारा ही इस धर्म का प्रारम्भ हुआ था। ऋषभदेव के बारे में ऋग्वेद में बताया गया है। अर्थात इससे पता चलता है कि वेदों से पहले जैन धर्म का अस्तित्व था। इनका …

24 तीर्थंकर Read More »