Mohit Kumar Jain

*फीमेल एक्सप्रेस क्यों नहीं चलाई जाती है *!!“एक औरत गुस्साती हुई,स्टेशन मास्टर के पास आयी,इक्कीसवीं सदी की रागिनी सुनायी… महिलाओं के लिए तीस-प्रतिशत आरक्षण का सिद्धांतक्यूँ नहीं अपना रहे हो, वर्षों से मेल-एक्सप्रेस चला रहे हो,फीमेल-एक्सप्रेस क्यूँ नहीं ला रहे हो ? स्टेशन मास्टर घबराया,मुश्किल से जवाब दे पाया, मैडम….. ‌ मैडम…मेल-एक्सप्रेस ही मेकअप,करते-करते लेट …

ट्रेन में मेल एक्सप्रेस ही होती है….उत्तम हास्य – व्यंग्य Read More »

मैं उम्र बताना नहीं चाहती हूँ, जब भी यह सवाल कोई पूछता है,मैं सोच में पड़ जाती हूँ, बात यह नहीं, कि मैं,उम्र बताना नहीं चाहती हूँ,बात तो यह है, की,मैं हर उम्र के पड़ाव को,फिर से जीना चाहती हूँ,इसलिए जबाब नहीं दे पाती हूँ, मेरे हिसाब से तो उम्र,बस एक संख्या ही है, जब …

उम्र Read More »

महात्मा गांधी यात्रा बहुत करते थे और इस दौरान वे अपने करीबियों के घर रुकना पसंद करते थे। उनका मानना था कि जब हम किसी के घर ठहरते हैं तो इससे अपनापन बढ़ता है। कुछ बातें हम उनसे सीखते हैं और कुछ वे लोग हम से सीखते हैं। एक बार गांधीजी जवाहरलाल नेहरू के साथ …

जल और अन्य वस्तुओं का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए Read More »

The hands of the Clock of Time are moving swiftly onward! We cry out, “Backward, turn backward, O Time in your flight,” but Time does not heed your cries. It is later than you think! Arouse yourself, fellow wayfarer; awake and take possession of your own mind while you still have enough Time to become, …

Clock of Time(Napoleon Hill) Read More »

The best way to remove fear from your mind is to replace it with PMA. Emile Coue, the French psychologist, gave us a very simple but practical formula for building PMA and maintaining a health consciousness: “Every day, in every way, I am getting better and better.” Repeat this sentence to yourself many times a …

Maintenance of Sound Health Read More »

महाभारत में एकलव्य की कथा हमें अनुशासन का महत्व समझाती है। एक दिन एकलव्य कौरव और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पास पहुंचा और बोला, ‘गुरुदेव मैं भी धनुर्विद्या सीखना चाहता हूं, कृपया मुझे भी अपना शिष्य बना लें।’ द्रोणाचार्य ने कहा, ‘मैं सिर्फ राजकुमारों को ही धनुर्विद्या का ज्ञान देता हूं। इसीलिए तुम्हें अपना …

अनुशासन, नियम और समर्पण Read More »

पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को जीभ से चाटकर कैल्शियम की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें । पढ़ाई का तनाव हमने पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था । “पुस्तक के बीच पौधे की पत्ती और मोरपंख रखने से हम होशियार …

काश वो समय फिर लौट आए । Read More »

पार्श्वनाथ प्रभु के 10 भव हुए। पूर्व भव में प्रभु की आत्मा प्राणत नाम के विमान में थी। वहाँ 20 सागरोपम का आयुष्य पूर्ण करके वहा रहेल मतिज्ञान , श्रुतज्ञान और अवधिज्ञान के साथ इक्ष्वाकुवंश के कश्यप गोत्र के काशी देश की वाराणसी नगरी के राजा अश्वसेन की वामादेवी राणी की कुक्षी में फागुन वद …

पार्श्वनाथ प्रभु Read More »

भोपाल का इतिहास ‘औरतों के शासन करने का इतिहास है’ पूरी दुनिया में कहीं भी एक के बाद एक 4 महिला शासिकाएँ नहीं हुईं, वो भी इतनी प्रोग्रेसिव व इतनी सेकुलर!भोपाल का इतिहास 240 साल पुराना है, जिसमें से 107 साल यह महिलाओं ने शासन किया।सेंट्रल लाइब्रेरी की यह बिल्डिंग सुल्तान जहां बेगम ने इसलिए …

भोपाल की रोचक बातें Read More »

तीन पहर तो बीत गये,बस एक पहर ही बाकी है।जीवन हाथों से फिसल गया,बस खाली मुट्ठी बाकी है।सब कुछ पाया इस जीवन में,फिर भी इच्छाएं बाकी हैं।दुनिया से हमने क्या पाया,यह लेखा जोखा बहुत हुआ,इस जग ने हमसे क्या पाया,बस यह गणनाएं बाकी हैं।तीन पहर तो बीत गये,बस एक पहर ही बाकी है।जीवन हाथों से …

तीन पहर Read More »