कबीरदास जी एक गांव से दूसरे गांव में घूमते रहते थे। एक गांव में कबीरदास जी रुके तो गांव के लोगों ने कहा, ‘आपके आने के बाद हमारे गांव में सब कुछ अच्छा हो गया है। प्रसन्नता का वातावरण है, लेकिन हमारे गांव की एक समस्या है। यहां एक वैश्या है, उसकी वजह से पूरा माहौल खराब हो रहा है। हम सभी ने उससे निवेदन भी किया कि या तो ये काम बंद कर दो या इस गांव से चली जाओ, लेकिन वह नहीं मान रही है। हमें समझ नहीं आ रहा है, कभी-कभी तो लगता है कि उसका घर जला दें।’
कबीरदास जी ने कहा, ‘ये काम तो बिल्कुल न करें। मैं इस संबंध में कुछ करता हूं।’
कबीरदास जी गांव के घरों से भिक्षा लेते थे तो उन्होंने अपना भिक्षा का पात्र लिया और उस वैश्या के घर पहुंचे। कबीरदास जी का व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक था और वे बात भी बहुत अच्छे ढंग से करते थे।
वैश्या ने देखा कि घर के बाहर एक फकीर खड़ा है। उसने कहा, ‘आप क्या चाहते हैं?’
कबीरदास जी ने कहा, ‘क्या दे सकती हो?’
एक फकीर से ये बात सुनकर वैश्या चौंक गई। वह बोली, ‘मैं तो सब कुछ दे सकती हूं, तुम क्या लेने आए हो?’
कबीरदास जी ने कहा, ‘मैं देह रूप नहीं, तुम्हारा दिव्य रूप लेने आया हूं।’
ये सुनकर वह वैश्या और ज्यादा हैरान हो गई। उसने पूछा, ‘बाबा आप कहना क्या चाहते हैं, साफ-साफ बताइए।’
कबीरदास जी ने कहा, ‘हमारी बाहरी देह के भीतर एक दिव्य रूप है, आत्मा है। देवी, कभी उस दिव्य रूप का भी आनंद लो तो बाहरी देह का मोह छुट जाएगा। क्या तुम मुझे दिव्य रूप की भिक्षा दे सकती हो?’
कबीरदास जी की बातें सुनकर वह महिला समझ गई कि ये संत कहना क्या चाहते हैं। उसने प्रणाम किया, उसकी आंखों में आंसु आ गए थे। उसने कहा, ‘आपकी जो भी आज्ञा होगी, मैं उसका पालन करूंगी। आज से देह व्यापार बंद और आप कहेंगे तो मैं इस गांव को भी छोड़ दूंगी।’
कबीरदास जी ने मुस्कान के साथ कहा, ‘पूरा संसार ही ऊपर वाले का गांव है। जहां जाओगी, ऐसे ही लोग मिलेंगे, लेकिन तुम क्या करोगी, वह महत्वपूर्ण है। गांव छोड़ने से नहीं, गलत आदत छोड़ने से जीवन सुधरेगा।’
उस महिला ने सभी गलत काम छोड़ दिए तो गांव वालों को बहुत आश्चर्य हुआ कि कबीरदास जी ने उस महिला का जीवन सुधार दिया।
सीख – अगर किसी व्यक्ति से बुरी आदत छुड़वाना हो तो सिर्फ दबाव से काम नहीं चलेगा। बुराई छुड़वाने के लिए समझाईश भी जरूरी है। हमारा समझाने का तरीका ऐसा होना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति हमारी हर बार आसानी से समझ सके।