एक गांव के लोग आपस में चर्चा कर रहे थे कि हमारे गांव के जंगल में भगवान महावीर कठिन तप कर रहे हैं और हमारे ही गांव के कुछ ग्वाले जब जंगल जाते हैं तो वे महावीर जी को तंग करते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं, टिप्पणियां करते हैं कि देखो ये आंखें बंद करके ढोंग कर रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि महावीर जी कभी भी किसी से कुछ नहीं कहते और अपनी तपस्या में डूबे रहते हैं। ये बात हमारे गांव के लिए अच्छी नहीं है।
गांव के लोग महावीर जी के पास पहुंचते हैं और कहते हैं, ‘हमारे गांव के बच्चे पशु चराने इस जंगल में आते हैं, ये आपको जानते नहीं हैं और परेशान करते हैं। हम इन्हें कई बार समझा चुके हैं, लेकिन बच्चे मानते नहीं हैं। हमारा एक निवेदन है कि आपके लिए हम एक कमरा बनवा देते हैं और उस कमरे के बाहर सुरक्षा की भी व्यवस्था कर देंगे। आप कमरे में तप करेंगे तो ये लोग आपको परेशान नहीं कर पाएंगे।’
भगवान महावीर ने सभी की बात सुनी और कहा, ‘मैं बिल्कुल परेशान नहीं होता और आप भी न हों। ये बच्चे हैं, ये नहीं जानते ये क्या कर रहे हैं? हमारे बच्चे जब छोटे होते हैं और जब हम उन्हें गोद में लेते हैं तो वे कभी हमारा मुंह नोचते हैं, कभी पैर मारते हैं तो क्या हम बच्चे को गोद से उतार देते हैं? आपने मेरे लिए कमरा बनाने के लिए जो धन इकट्ठा किया है, उस धन को गांव के उन लोगों के लिए उपयोग में ले लें, जिनके घर पर छत नहीं है।’
गांव के लोग भगवान महावीर की विशाल हृदयता के आगे नतमस्तक हो गए।
सीख – जब हम कोई साधना करें, कोई ऐसा काम करें, जिसमें डूबकर हमें परिणाम प्राप्त करना है तो हमें छोटी-छोटी बाधाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बाधाओं के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए। जब हम बाधाओं के लिए सकारात्मक रहते हैं तो इससे हमारी ऊर्जा बढ़ती है। अपने मूल काम से इधर-उधर न भटकें, दुनिया में हमें परेशान करने वाले लोग काफी हैं, ये सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन हमें कितना परेशान होना है, ये हमें खुद ही तय करना है।