कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ पड़ाव पर्व पर्युषण

उपवास में कमीं रह भी जाए तो..

उपहास से अवश्य बचना,

दर्शन में कमीं रह भी जाए तो…

प्रदर्शन से अवश्य बचना ।

वन्दन में कमीं रह भी जाए तो…

बंधन से अवश्य बचना ।

प्रवचन श्रवण में कमीं रह भी जाए तो…

दुर्वचन से अवश्य बचना ।

केश लोचन नहीं भी कर सकें तो..

क्लेश लोचन अवश्य करना ।

प्रतिकमण में कमीं रह भी जाए तो…

अतिक्रमण से अवश्य बचना ।

क्षमा मांगने में कमीं रह भी जाए तो..

प्राणी मात्र को क्षमा अवश्य करना ।

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