किसी भी सशंकित मन में काम की शुरुआत से ही डर हावी हो जाता है। हम सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति के जरिए अपने डर पर काबू पाते हुए काम को सफल अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।
1)अक्सर यह देखा जाता है कि लोग अपनी सफलता को लेकर सशंकित रहते हैं। आप चाहे अध्ययन कर रहे हों या जॉब के दौरान आपको कोई नया असाइनमेंट मिला हो, हर मामले में सशंकित मन में डर पहले हावी होता है। ऐसी स्थिति में आप सकारात्मक सोच और अपनी इच्छाशक्ति के बलबूते इस डर को दूर कर सकते हैं। यहां कुछ ऐसे उपाय पेश हैं, जिनके जरिए आप अपने डर पर काबू पाकर पूरे आत्मविश्वास के साथ काम को सफल अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।
2)जब तक आपके अंदर किसी काम के प्रति पूर्ण आत्मविश्वास नहीं आ जाता, तब तक आप उसमें सफल नहीं हो सकते। मतलब यदि आप डर गए तो कभी जीत नहीं पाएंगे। ऐसे में जिस डर के कारण आप भयभीत होते हैं, क्यों न उसी से दोस्ती कर ली जाए।
3)कुछ पुरानी अच्छी यादें ताजा करें। आज जो आपके जिगरी दोस्त हैं उनसे जब आप पहली बार मिले थे, तब आपके दिमाग में अजीब से ख्याल जरूर आए होंगे। धीरे-धीरे उस व्यक्ति से घनिष्ठता बढ़ जाती है और आप एक-दूसरे के व्यवहार को समझने लगते हैं। यही बात काम के संबंध में भी लागू होती है। अपनी झिझक मिटाएं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।
4)शुरुआत में हमें अच्छी चीज से भी भय लगता है। फर्ज कीजिए कि आपको दफ्तर में कोई अच्छा असाइनमेंट दिया जा रहा हो, तो शुरू में आपको लगता है कि कौन इस पचड़े में पड़े। मैं तो जो कर रहा हूं, वही ठीक है। कई बार सहकर्मी भी आपको हतोत्साहित करते हैं। लेकिन जब आप उस असाइनमेंट के सकारात्मक पहलुओं पर विचार कर उसे स्वीकार लेते हैं और उसे बेहतर तरीके से अंजाम देते हैं, तो वही जॉब के दौरान आपकी तरक्की और प्रशंसा का कारण बन जाता है।
5)डर की अहमियत कहीं-कहीं बहुत ज्यादा होती है मसलन बुरे काम करने से डरना, बुरी नीयत से डरना, कामचोरी और दूसरों की निंदा से डरना और किसी का बुरा करने से डरना। यहां तक डर को अहमियत दी जाए, तो ठीक है, लेकिन इसे पढ़ाई और नौकरी के दौरान हावी न होनें दें, अन्यथा आप जीवनभर डरते रहेंगे और कभी तरक्की नहीं कर पाएंगे।