एक सेठ बहुत धनवान थे। उन्हें धन का बहुत घमंड था। एक दिन वे मुनिराज को पास पहुंचे और नमस्कार कर कहने लगे, स्वामिन्! आप तो विशेष ज्ञानी हैं, कुछ भविष्य की भी जानते होंगे।
मुनिराज ने कहा – मैं तो भविष्यवक्ता हूँ। मेरी वाणी कोई भी क्या, सर्वज्ञ भी अन्यथा सिद्ध नहीं कर सकते।
सेठ – बोले प्रभु, तब मेरा भविष्य बतलाने की महती कृपा करे।
मुनिराज ने कहा- मेरी सच्ची भविष्यवाणी सुनिये -आप यह सब ठाट बाट छोड़कर अवश्य मरेंगे। इसे कोई अन्यथा नहीं कर सकता, यह परम सत्य है। सेठ अवाक रह गया।